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भैरव पर्वत शक्तिपीठ || Bhairav Parvat Shakti Peeth

 

भैरव पर्वत शक्तिपीठ || Bhairav Parvat Shakti Peeth 



कहाँ स्थित है


मध्यप्रदेश के उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट के पास भैरव पर्वत पर माता के ऊर्ध्व ओष्ठ (ऊपरी होठ) गिरे थे। इसकी शक्ति है अवंती और भैरव को लम्बकर्ण कहते हैं। हालांकि इसकी स्थिति को लेकर भी मतभेद हैं। कुच विद्वानों के अनुसार इसी स्थिति गुजरात के गिरनार पर्वत के निकट भैरव पर्वत पर है। अत: दोनों स्थानों पर शक्तिपीठ की मान्यता है। चूंकि शक्ति अवंती होने के कारण उज्जैन को सर्वाधिक मान्यता प्राप्त है। देवी मां की मूर्ति हमेशा लाल कपड़े से ढकी रहती है एवं हर दिन प्रार्थना और अन्य अनुष्ठान नियमित होते हैं।




पौराणिक  कथा


जब महादेव शिवजी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। शिवजी जो जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए। हालांकि पौराणिक आख्यायिका के अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जो भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें में 51 का खास महत्व है।




कैसे पहुंचे


उज्जैन भारत के सभी शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और लोग यहां आने के लिए परिवहन के सभी साधनों का उपयोग कर सकते हैं।


वायु मार्ग

इंदौर निकटतम हवाई अड्डा इंदौर मैं है और यह 52 किलोमीटर की दूरी पर है।


रेल मार्ग

निकटतम रेलवे स्टेशन उज्जैन ही है।



लोकेशन- मंदिर का समय- सुबह 5 बजे से रात 9:00 बजे तक


मंदिर दर्शन का सही समय- अगस्त से मार्च के बीच में, 


निकतम रेलवे स्टेशन उज्जैन जंक्शन


निकतम हवाई अड्डा इंदौर

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