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51 Shakti Peeth || 51 शक्तिपीठ के बारे में जाने

 

51 Shakti Peeth || 51 शक्तिपीठ के बारे में जाने



शक्तिपीठ से जुड़ी कहानी

यह माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने देवी आदि शक्ति और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ किया था। देवी आदि शक्ति प्रकट हुई,जो शिव से अलग होकर ब्रह्मा को ब्रह्मांड के निर्माण में मदद की। ब्रह्मा बेहद खुश थे और शिव को देवी आदि शक्ति वापस देने का फैसला करते हैं। इसलिए उनके पुत्र दक्ष ने माता सती को अपनी बेटी के रूप में प्राप्त करने के लिए कई यज्ञ किया था। भगवान शिव से शादी करने के इरादे से माता सती को इस ब्रह्मांड में लाया गया था, और दक्ष का यह यज्ञ सफल रहा।

 

भगवान शिव के अभिशाप में भगवान ब्रह्मा ने अपने पांचवें सिर को शिव के सामने अपने झूठ के कारण खो दिया था। दक्ष को इसी वजह से भगवान शिव से द्वेष था और भगवान शिव और माता माता सती की शादी नहीं कराने का निर्णय लिया था। हालांकि, माता सती शिव की ओर आकर्षित हो गई और माता सती ने कठोर तपस्या की और अंत में एक दिन शिव और माता सती का विवाह हुआ।

 

भगवान शिव पर प्रतिशोध लेने की इच्छा के साथ दक्ष ने यज्ञ किया। दक्ष ने भगवान शिव और अपनी पुत्री माता सती को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया। माता सती ने यज्ञ में उपस्थित होने की अपनी इच्छा शिव के सामने व्यक्त की, जिन्होंने उसे रोकने के लिए अपनी पूरी कोशिश की परंतु माता सती यज्ञ में चली गई। यज्ञ के पहुंचने के पश्चात माता सती का स्वागत नहीं किया गया। इसके अलावा, दक्ष ने शिव का अपमान किया। माता सती अपने पिता द्वारा अपमान को झेलने में असमर्थ थी, इसलिए उन्होंने अपने शरीर का बलिदान दे दिया।

 

अपमान और चोट से क्रोधित भगवान शिव ने तांडव किया और शिव के वीरभद्र अवतार में दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया और उसका सिर काट दिया। सभी मौजूद देवताओं से अनुरोध के बाद दक्ष को वापस जीवित किया गया और मनुष्य किस कर के चलें एक बकरी का सिर लगाया गया। दुख में डूबे शिव ने माता सती के शरीर को उठाकर, विनाश का दिव्य नृत्य, किया। अन्य देवताओं ने विष्णु को इस विनाश को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया, जिस पर विष्णु ने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल करते हुए माता सती के देह के 52 टुकड़े कर दिए। शरीर के विभिन्न हिस्सों भारतीय उपमहाद्वीप के कई स्थानों पर गिरे और वह शक्ति पीठों के रूप में स्थापित हुए।

 

शक्ति पीठ का अर्थ है ऊर्जा की एक सीट।

 

शक्ति पीठ (ऊर्जा की सीट) वह जगह है जहां लोगों ने लंबे समय तक ध्यान किया है और वहां ऊर्जा पाई गई है। जब आप ध्यान और गाते हैं तो उस स्थान पर ऊर्जा इकट्ठा हो जाती है। जब आप सकारात्मक स्थिति में होते हैं, न केवल आप, यहां तक कि खंभे, और पेड़ों और पत्थरों सकारात्मक कंपनों को अवशोषित करते हैं। इसी प्रकार ये शक्ति पीठ का निर्माण हुआ।

 

देवी पुराण के अनुसार 51 शक्तिपीठों की स्थापना की गयी है और यह सभी शक्तिपीठ बहुत पावन तीर्थ माने जाते हैं। वर्तमान में यह 51 शक्तिपीठ पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका,और बांग्लादेश, के कई हिस्सों में स्थित है।

 

कुछ महान धार्मिक ग्रंथ जैसे शिव पुराण, देवी भागवत, कालिक पुराण और अष्टशक्ति के अनुसार चार प्रमुख शक्ति पिठों को पहचाना गया है, जो निम्नलिखित हैं

 


कालीपीठ- कालिका

कोलकाता के कालीघाट में माता के बाएँ पैर का अँगूठा गिरा था। यह पीठ स्थान हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन हावड़ा है और निकटतम मेट्रो स्टेशन कालीघाट है। मंदिर का दौरा करने का सबसे अच्छा समय सुबह या दोपहर है।

 


कामगिरि- कामाख्‍या

असम के गुवाहाटी जिले में स्‍थित नीलांचल पर्वत के कामाख्या स्थान पर माता का योनि भाग गिरा था। गुवाहाटी असम की राजधानी है, और सभी प्रकार की यात्रा सुविधाओं से निपुण है। यदि हम ट्रेन से जाते हैं और सीधे मंदिर से संपर्क करना चाहते हैं, तो हमें निलाचल स्टेशन पर उतरना होगा। वहां से, पहाड़ी पर चढ़ने के लिए दो मार्ग हैं एक कदम मार्ग (लगभग 600 कदम) और बस मार्ग (कामख्या द्वार के माध्यम से, लगभग 3 किलोमीटर।

 


तारा तेरणी

तारा तेरणी मंदिर को सबसे अधिक सम्मानित शक्ति पीठ और हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थान केंद्रों में से एक माना जाता है। यह माना जाता है कि देवी माता सती का स्तन कुमारी पहाड़ियों पर गिर गया जहां तारा तेरणी पीठ स्थित है। ब्रह्मपुर मंदिर से 35 किमी, भुवनेश्वर (165 किमी) और पुरी (220 किमी) स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन हार्हाह-चेन्नई लाइन पर दक्षिण-पूर्व रेलवे पर बेरहमपुर है। 165 किमी दूर स्थित, भुवनेश्वर निकटतम हवाई अड्डा है, जहां से दिल्ली और कलकत्ता जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें ली जा सकती है।

 


4. पडा बिमला

विमला मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो देवी विमला को समर्पित है, जो भारत के उड़ीसा राज्य में पुरी में जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर स्थित है। यह एक शक्ति पीठ के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि यहां देवी माता सती के पैर गिरे थे।


अन्य प्रमुख 51 शक्ति पीठ की सूची इस प्रकार है:





1. किरीट शक्तिपीठ (
Kirit Shakti Peeth)

किरीट शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर मौजूद है। यहां माता सती का किरीट यानी शिराभूषण अथवा मुकुट गिरा था। यहां शक्ति विमला अथवा भुवनेश्वरी तथा भैरव संवर्त को पूजा जाता है।




2. कात्यायनी शक्तिपीठ (Katyayani Shakti Peeth)

यह वृन्दावन, मथुरा के भूतेश्वर में स्थित है। कात्यायनी वृन्दावन शक्तिपीठ में माता सती के केशपाश गिरे थे। यहां देवी कात्यायनी तथा भैरव भूतेश को पूजा जाता है।






3. करवीर शक्तिपीठ (
Karveer shakti Peeth)

करवीर शक्तिपीठ महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। इस शक्तिपीठ में माता के त्रिनेत्र गिरे थे। यहां की शक्ति महिषासुरमदिनी तथा भैरव क्रोधशिश हैं। इस स्थान को महालक्ष्मी का निज निवास माना जाता है।







4. श्री पर्वत शक्तिपीठ (Shri Parvat Shakti Peeth): 

इस शक्तिपीठ को लेकर विद्वानों के मत में अंतर है। दरअसल कुछ विद्वानों का मानना है कि इस पीठ का मूल स्थल लद्दाख है, वहीं कुछ मानते हैं कि यह असम के सिलहट में है। इस स्थान पर माता सती का दक्षिण तल्प यानी कनपटी गिरी थी। यहां की शक्ति श्री सुन्दरी एवं भैरव सुन्दरानन्द जी हैं।






5. विशालाक्षी शक्तिपीठ (Vishalakshi Shakti Peeth): 

यह शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी के मीरघाट पर स्थित है। इस स्थान पर माता सती के दाहिने कान के मणि गिरी थी। यहां की शक्ति विशालाक्षी तथा भैरव काल भैरव हैं।




6. गोदावरी तट शक्तिपीठ (Godavari Shakti Peeth)

आंध्रप्रदेश के कब्बूर में गोदावरी तट पर यह शक्तिपीठ मौजूद है। माना जाता है कि यहां माता का वामगण्ड यानी बायां कपोल गिरा था। यहां की शक्ति विश्वेश्वरी या रुक्मणी तथा भैरव दण्डपाणि हैं।





7. शुचीन्द्रम शक्तिपीठ (Suchindram shakti Peeth): 

शुची शक्तिपीठ तमिलनाडु के कन्याकुमारी के त्रिसागर संगम स्थल पर स्थित है। इस जगह पर सती माता के मतान्तर से पृष्ठ भाग गिरे थे। यहां की शक्ति नारायणी तथा भैरव संहार या संकूर हैं।



8. पंच सागर शक्तिपीठ (Panchsagar Shakti Peeth): 

आपको बता दें कि इस शक्तिपीठ का कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है लेकिन माना जाता है कि यहां माता के नीचे के दांत गिरे थे। यहां की शक्ति वाराही तथा भैरव महारुद्र हैं।




9. ज्वालामुखी शक्तिपीठ (Jwalamukhi Shakti Peeth): 

ज्वालामुखी शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा में स्थित है। यहां माता सती की जीभ गिरी थी। यहां की शक्ति सिद्धिदा व भैरव उन्मत्त हैं।






10. भैरव पर्वत शक्तिपीठ (Bhairavparvat Shakti Peeth): 

इस शक्तिपीठ के स्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ लोग गुजरात के गिरिनार के निकट भैरव पर्वत को तो कुछ मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट क्षिप्रा नदी तट पर वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं, जहां माता का ऊपर का ओष्ठ गिरा है। यहां की शक्ति अवन्ती तथा भैरव लंबकर्ण हैं।






11. अट्टहास शक्तिपीठ (Attahas Shakti Peeth): 

अट्टहास शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के लाबपुर में स्थित है। यहां माता का अध्रोष्ठ यानी नीचे का होंठ गिरा था। यहां की शक्ति फुल्लरा तथा भैरव विश्वेश हैं।





12. जनस्थान शक्तिपीठ (Janasthan Shakti Peeth): 

महाराष्ट्र नासिक के पंचवटी में जनस्थान शक्तिपीठ स्थित है। इस स्थान पर माता की ठुड्डी गिरी थी। यहां की शक्ति भ्रामरी तथा भैरव विकृताक्ष हैं।







13. कश्मीर शक्तिपीठ या अमरनाथ शक्तिपीठ (Kashmir Shakti Peeth or Amarnath Shakti Peeth): 

जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ में स्थित इस शक्तिपीठ में माता का कण्ठ गिरा था। यहां की शक्ति महामाया तथा भैरव त्रिसंध्येश्वर हैं।





14. नन्दीपुर शक्तिपीठ (Nandipur Shakti Peeth): 

पश्चिम बंगाल के सैन्थया में स्थित इस शक्तिपीठ में देवी की देह का कण्ठहार गिरा था। इस स्थान की शक्ति नन्दनी और भैरव निन्दकेश्वर हैं।





15. श्री शैल शक्तिपीठ (Shri Shail Shakti Peeth): 

आंध्रप्रदेश के कुर्नूल के पास श्री शैल का शक्तिपीठ है। इस जगह पर माता की ग्रीवा गिरी थी। यहां की शक्ति महालक्ष्मी तथा भैरव संवरानन्द अथवा ईश्वरानन्द हैं।





16. नलहटी शक्तिपीठ (Nalhati Shakti Peeth): 

पश्चिम बंगाल के बोलपुर में नलहटी शक्तिपीठ स्थित है। इस स्थल पर माता की उदरनली गिरी थी। यहां की शक्ति कालिका तथा भैरव योगीश हैं।





17. मिथिला शक्तिपीठ (Mithila Shakti Peeth): 

इसके निश्चित स्थान को लेकर मतभेद हैं। अलग अलग मतों के अनुसार तीन स्थानों पर मिथिला शक्तिपीठ बताया जाता है। माना जाता है कि नेपाल के जनकपुर, बिहार के समस्तीपुर और सहरसा में माता का वाम स्कंध गिरा था। यहां की शक्ति उमा या महादेवी तथा भैरव महोदर हैं।





18. रत्नावली शक्तिपीठ (Ratnavali Shakti Peeth): 

इसका निश्चित स्थान अज्ञात है। माना जाता है कि रत्नावली शक्तिपीठ तमिलनाडु के चेन्नई में कहीं स्थित है। इस जगह पर माता का दक्षिण स्कंध गिरा था। यहां की शक्ति कुमारी तथा भैरव शिव हैं।





19. अम्बाजी शक्तिपीठ (Ambaji Shakti Peeth): 

गुजरात जूनागढ़ के गिरनार पर्वत के शिखर पर माता का उदर गिरा था। इस स्थान पर देवी अम्बिका का भव्य मंदिर है। यहां की शक्ति चन्द्रभागा तथा भैरव वक्रतुण्ड हैं।





20. जालंधर शक्तिपीठ (Jalandhar Shakti Peeth): 

यह शक्तिपीठ पंजाब के जालंधर में स्थित है। इस स्थान पर माता का वामस्तन गिरा था। यहां की शक्ति त्रिपुरमालिनी तथा भैरव भीषण हैं।


21. रामागिरि शक्तिपीठ (Ramgiri Shakti Peeth): 

इस शक्तिपीठ के स्थान को लेकर भी मतभेद हैं। कुछ लोग यह उत्तर प्रदेश के चित्रकूट तो कुछ मध्यप्रदेश के मैहर में यह स्थान मानते हैं। इस जगह पर माता का दाहिना स्तन गिरा था। यहां की शक्ति शिवानी तथा भैरव चण्ड हैं।





22. वैद्यनाथ शक्तिपीठ (Vaidhnath Shakti Peeth): 

वैद्यनाथ शक्तिपीठ झारखंड के गिरिडीह, देवघर में स्थित है। यहां की शक्ति जयदुर्गा तथा भैरव वैद्यनाथ है। ऐसी मान्यता है कि यहां पर सती का दाह-संस्कार हुआ था।





23. वक्त्रेश्वर शक्तिपीठ (Varkreshwar Shakti Peeth): 

यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के सैन्थया में स्थित है। इस स्थान पर माता का मन गिरा था। यहां की शक्ति महिषासुरमर्दिनी तथा भैरव वक्त्रानाथ हैं।





24. कन्याकुमारी शक्तिपीठ (Kanyakumari Shakti Peeth): 

कण्यकाश्रम शक्तिपीठ तमिलनाडु के कन्याकुमारी के तीन सागरों हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है। इस जगह पर माता की पीठ गिरी थी। यहां की शक्ति शर्वाणि या नारायणी तथा भैरव निमषि या स्थाणु हैं।





25. बहुला शक्तिपीठ (Bahula Shakti Peeth): 

बहुला शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के कटवा जंक्शन के निकट केतुग्राम में स्थित है। यहां माता का वाम बाहु गिरा था। यहां की शक्ति बहुला तथा भैरव भीरुक हैं।





26. उज्जयिनी हरसिद्धि शक्तिपीठ (Ujjaini Shakti Peeth): 

उज्जयिनी हरसिद्धि शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के उज्जैन के पावन क्षिप्रा के दोनों तटों पर स्थित है। यहां माता की कोहनी गिरी थी। यहां की शक्ति मंगल चण्डिका तथा भैरव मांगल्य कपिलांबर हैं।





27. मणिवेदिका शक्तिपीठ (Manivedika Shakti Peeth): 

गायत्री मंदिर के नाम से मशहूर यह शक्तिपीठ राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। यहां माता की कलाइयां गिरी थीं। यहां की शक्ति गायत्री तथा भैरव शर्वानन्द हैं।





28. प्रयाग शक्तिपीठ (Prayag Shakti Peeth): 

यह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित है। इस जगह पर माता के हाथ की अंगुलियां गिरी थी। इसके स्थान को लेकर भी मतभेद है। इसे अक्षयवट, मीरापुर और अलोपी स्थानों पर गिरा माना जाता है। तीनों शक्तिपीठ की शक्ति ललिता हैं तथा भैरव भव हैं।





29. उत्कल शक्तिपीठ (Utakal Shakti Peeth): 

यह स्थान उड़ीसा के पुरी और याजपुर में माना जाता है। यहां माता की नाभि गिरी था। इस शक्तिपीठ की शक्ति विमला तथा भैरव जगन्नाथ पुरुषोत्तम हैं।





30. कांची शक्तिपीठ (Kanchi Shakti Peeth): 

कांची शक्तिपीठ तमिलनाडु के कांचीवरम् में स्थित है। इस जगह पर माता का कंकाल शरीर गिरा था। यहां की शक्ति देवगर्भा तथा भैरव रुरु हैं।





31. कालमाधव शक्तिपीठ (Kalmadhav Shakti Peeth):

इस शक्तिपीठ के बारे कोई निश्चित स्थान पता नहीं है। माना जाता है कि यहां माता का वाम नितम्ब गिरा था। यहां की शक्ति काली तथा भैरव असितांग हैं।





32. शोण शक्तिपीठ (Shondesh Shakti Peeth): 

मध्य प्रदेश के अमरकंटक के नर्मदा पर मन्दिर शोण शक्तिपीठ स्थित है। यहां माता का दक्षिण नितम्ब गिरा था। एक अन्य मान्यता के अनुसार बिहार के सासाराम का ताराचण्डी मंदिर ही शोण तटस्था शक्तिपीठ है। यहां सती का दायां नेत्रा गिरा था। यहां की शक्ति नर्मदा या शोणाक्षी तथा भैरव भद्रसेन हैं।





33. कामाख्या शक्तिपीठ (Kamakhya Shakti Peeth): 

यह मशहूर शक्तिपीठ असम गुवाहाटी के कामगिरि पर्वत पर स्थित है। यहां माता की योनि गिरी थी। यहां की शक्ति कामाख्या तथा भैरव उमानन्द हैं।





34. जयंती शक्तिपीठ (Jayanti Shakti Peeth): 

जयंती शक्तिपीठ मेघालय के जयंतिया पहाडी पर स्थित है। इस स्थान पर माता की वाम जंघा गिरी थी। यहां की शक्ति जयंती तथा भैरव क्रमदीश्वर हैं।





35. मगध शक्तिपीठ (Magadh Shakti Peeth):

बिहार की राजधनी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी को ही शक्तिपीठ माना जाता है। इस जगह पर माता की दाहिना जंघा गिरी थी। यहां की शक्ति सर्वानन्दकरी तथा भैरव व्योमकेश हैं।





36. त्रिस्तोता शक्तिपीठ (Tristotaa Shakti Peeth): 

त्रिस्तोता शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के शालवाड़ी गांव में तीस्ता नदी पर स्थित है। यहां माता का वामपाद गिरा था। यहां की शक्ति भ्रामरी तथा भैरव ईश्वर हैं।





37. त्रिपुरी सुन्दरी शक्तिपीठ (Tripura Sundari Shakti Peeth): 

माता का दक्षिण पाद त्रिपुरा के राध किशोर ग्राम में गिरा था और उसी जगह पर त्रिपुरा सुन्दरी शक्तिपीठ मौजूद है। यहां की शक्ति त्रिपुर सुन्दरी तथा भैरव त्रिपुरेश हैं।





38. विभाषा शक्तिपीठ (Vibhasha Shakti Peeth): 

विभाषा शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के ताम्रलुक ग्राम में स्थित है। इस स्थान पर माता का वाम टखना गिरा था। यहां की शक्ति कपालिनी, भीमरूपा तथा भैरव सर्वानन्द हैं।





39. कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ (Kurukshetra Shakti Peeth): 

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जंक्शन के निकट द्वैपायन सरोवर के पास कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ है। इसे श्रीदेवीकूप भद्रकाली पीठ के नाम से भी जाना जाता है। इस पवित्र स्थान पर माता के दाहिने चरण गिरे थे। यहां की शक्ति सावित्री तथा भैरव स्थाणु हैं।





40. युगाद्या शक्तिपीठ, क्षीरग्राम शक्तिपीठ (Yugadhya Shakti Peeth): 

युगाद्या शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बर्दमान जिले के क्षीरग्राम में स्थित है। यहां सती माता के दाहिने चरण का अंगूठा गिरा था। यहां की शक्ति जुगाड़या और भैरव क्षीर खंडक है।





41. विराट अम्बिका शक्तिपीठ (Virat Shakti Peeth): 

यह शक्तिपीठ राजस्थान के गुलाबी नगरी जयपुर के वैराटग्राम में स्थित है। माता सती के दाहिने पैर की अंगुलियां यहां गिरी थीं।। यहां की शक्ति अंबिका तथा भैरव अमृत हैं।





42. कालीघाट शक्तिपीठ (Kalighat Shakti Peeth): 

कालीमन्दिर के नाम से विख्यात यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल, कोलकाता के कालीघाट में स्थित है। यहां माता के दाहिने पैर के अंगूठे को छोड़ 4 अन्य अंगुलियां गिरी थीं। यहां की शक्ति कालिका तथा भैरव नकुलेश हैं।





43. मानस शक्तिपीठ (Manas Shakti Peeth): 

मानस शक्तिपीठ तिब्बत के मानसरोवर तट पर स्थित है। इस स्थान पर माता की दाहिनी हथेली गिरी थी। यहां की शक्ति द्राक्षायणी तथा भैरव अमर हैं।





44. लंका शक्तिपीठ (Lanka Shakti Peeth): 

माता सती के पायल श्रीलंका में स्थित लंका शक्तिपीठ वाले स्थान पर गिरे थे। यहां की शक्ति इन्द्राक्षी तथा भैरव राक्षसेश्वर हैं। इस शक्तिपीठ के सही स्थान को लेकर संशय है।





45. गण्डकी शक्तिपीठ (Gandaki Shakti Peeth): 

गण्डकी शक्तिपीठ नेपाल में गण्डकी नदी के उद्गम स्थल पर मौजूद है। यहां माता सती का दक्षिण कपोल गिरा था। यहां शक्ति गण्डकी तथा भैरव चक्रपाणि हैं।





46. गुह्येश्वरी शक्तिपीठ (Guhyeshwari Shakti Peeth): 

गुह्येश्वरी शक्तिपीठ नेपाल के काठमाण्डू में पशुपतिनाथ मंदिर के नजदीक ही स्थित है। इस स्थान पर माता सती के दोनों घुटने गिरे थे। यहां की शक्ति महामाया और भैरव कपाल हैं।





47. हिंगलाज शक्तिपीठ (Hinglaj Shakti Peeth): 

हिंगलाज शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित है। यहां माता का ब्रह्मरन्ध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था। यहां की शक्ति कोट्टरी और भैरव भीमलोचन है।





48. सुगंध शक्तिपीठ (Sugandha Shakti Peeth): 

बांग्लादेश के खुलना में सुगंध नदी के तट पर उग्रतारा देवी का शक्तिपीठ स्थित है, जहां माता की नासिका गिरी थी। यहां की देवी सुनन्दा (मतांतर से सुगंधा) है तथा भैरव त्रयम्बक हैं।





49. करतोया शक्तिपीठ (Kartoya Shakti Peeth): 

करतोयाघाट शक्तिपीठ बंग्लादेश के भवानीपुर के बेगड़ा में करतोया नदी के तट पर स्थित है। इस जगह पर माता की वाम तल्प गिरी थी। यहां देवी अपर्णा रूप में तथा शिव वामन भैरव रूप में वास करते हैं।





50. चट्टल शक्तिपीठ (Chatal Shakti Peeth): 

चट्टल शक्तिपीठ बंग्लादेश के चटगांव में स्थित है। ये वो स्थान है जहां माता की दाहिनी भुजा गिरी थी। यहां की शक्ति भवानी तथा भैरव चन्द्रशेखर हैं।





51. यशोर शक्तिपीठ (Yashor Shakti Peeth): 

माता का यशोरेश्वरी शक्तिपीठ बांग्लादेश के जैसोर खुलना में स्थित है। यहां माता की बायीं हथेली गिरी थी। यहां शक्ति यशोरेश्वरी तथा भैरव चन्द्र हैं।







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नन्दीपुर शक्तिपीठ || Nandipur Shakti Peeth