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नन्दीपुर शक्तिपीठ || Nandipur Shakti Peeth

 नन्दीपुर शक्तिपीठ || Nandipur Shakti Peeth





कैसे बने ये शक्तिपीठ  


जब महादेव शिवजी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। शिवजी जो जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए। हालांकि पौराणिक आख्यायिका के अनुसार देवी देह के अंगों से इनकी उत्पत्ति हुई, जो भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें में 51 का खास महत्व है।


पौराणिक  कथा


पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के सैंथिया रेलवे स्टेशन नंदीपुर स्थित चारदीवारी में बरगद के वृक्ष के समीप माता का गले का हार गिरा था। इसकी शक्ति है नंदिनी और भैरव को नंदिकेश्वर कहते हैं। माता को वागरी भाषा में नंदोर बोला जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के हिसाब से नंदनी माता द्वापर युग में यशोदा की बेटी थी, जो कंस से मारी गई थी। इनका उल्लेख दुर्गा सप्तमी में मिलता है।



मंदिर की वास्तुकला


शहर के मुख्य मंदिर मां नन्दीकेश्वरी के मंदिर का है । देवी कछुआ के आकार में सिंदूर के साथ लिप्त एक बड़ी चट्टान के रूम में मौजूद हंै । मां एक चांदी मुकुट और तीन सोने की आंखों से सजी है । विशेष त्यौहार जैसे वैसाखी पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा के दिन पर विशेष अनुष्ठान काली पूजा पर और अमावस्या पर आयोजित की जाती है । और रोजाना मां को दोपहर में ‘‘ अन्ना भोग ’’ चावल का भोग लगाया जाता है ।




आकर्षण का केन्द्र


इस मंदिर में नन्देश्वर रूप भैरव विराजमान हैं । मंदिर परिसर के अन्दर दस-अवतार भगवान विष्णुष् हनुमानजी, राम-सीता, नवदुर्गा,भगवान शिव और कुछ अधिक के कई अन्य मंदिर हैं । इन मंदिरों पर कई देवी देवताओं के आंकड़ों के सुन्दर चित्रों बने हैं । भक्त उनकी इच्छाओं की पूर्ति कराने के लिए लाल और पीले धागे बांधते हैं । इस महान दिव्य जगह की मुख्य मूर्तियों यहां पूजा की नन्देश्वरी (तिस्ता नदी के तट में स्थित)  के रूप में ‘‘ नंदिनी’’ और भगवान शिव के रूप में देवी है । पवित्र जगह मां दुर्गा और भगवान शिव को समर्तित है । मंदिर के बगल में स्थित है जो भगवान जगन्नाथ मंदिर भी है ।



कैसे पहुंचे


पश्चिम बंगाल के वीरभूमि या बीरभूम में माता के कई शक्तिपीठ हैं। बीरभूम से विभिन्न स्थानों से शुरू होने वाली कई सीधी बसें हैं।


निकतम रेलवे स्टेशन सैंथिया रेलवे स्टेशन, यह शक्ति पीठ स्थानीय रेलवे स्टेशन स केवल 10 मिनट की दूरी पर है।


निकतम हवाई अड्डा निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे है।

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