विशालाक्षी शक्तिपीठ (Vishalakshi Shakti Peeth)
वाराणसी विशालाक्षी भी दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यहां भी देवी सती का एक स्थान अर्थात शक्ति पीठ है। इस स्थान पर बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। वाराणासी वैसे भी भारत की सांस्कृतिक राजधानी है। यह पुरातत्त्व पौराणिक कथाओं भूगोल कला और इतिहास से संबंधित एक महान केंद्र है। काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर माता शक्ति का ये स्थान मौजूद है। इन्हें काशी विक्षालक्ष्मी कहा जाता है।
कहाँ स्थित है
यह दक्षिण पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्य उत्तरी मध्य भारत में गंगा नदी के बाएं तट पर स्थित है और हिन्दुओं के सात पवित्र पुरियों में से एक है इस पवित्र स्थल को हम बनारस और काशी नगरी के नाम से भी जानते हैं। इस शहर को मन्दिरों एवं घाटों का नगर भी कहा जाता है। इसी स्थान पर मौजूद काशी विशालाक्षी मंदिर है, जिसका वर्णन देवी पुराण में किया गया हैं। काशी में मणिकर्णिक घाट पर माता के कान की बाली गिरी थी।
पौराणिक कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती की माता के कान की बाली इस स्थान पर गिरी थी।
काशी विशालाक्षी मंदिर भारत का अत्यंत पावन तीर्थस्थल है यहां की शक्ति विशालाक्षी माता तथा काल भैरव विराजमान हैं। श्रद्धालु यहां शुरू से ही देवी मां के रूप में विशालाक्षी तथा भगवान शिव के रूप में काल भैरव की पूजा करने आते हैं। यह स्थान कई तरह की लोक कथाओं के लिए भी प्रचलित है। लेकिन जिस घाट पर माता के कानों की बाली गिरी थी वह सभी के लिए अति रोचक और अविस्मरणीय होता है।
प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट को महादेव से जोड़कर देखा जाता है ऐसी भी मान्यता है कि माता सती के कानों की बाली ढूंढने का महादेव ने प्रयास भी किया था। यह मान्यता यहां अब भी प्रचलित है। स्थानीय लोगों की माता और महादेव दोंनों के ही साक्षात रुपों में बड़ी आस्था है यहां पूरे देश से ही नही विदेश से भी भक्त पहुंचते हैं।
कैसे पहुंचे
वाराणसी के दो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं शहर के केंद्र में वाराणसी जंक्शन और मुगल सराय जंक्शन शहर लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पहुंचना बहुत ही आसान है। हालांकि ये एक ऐसा स्थान है जो सदा व्यस्त रहता है। वाराणसी हवाई अड्डा शहर के केंद्र से लगभग 25 किलोमीटर दूर है।





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