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Mallikarjuna Jyotirlinga || मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

 Mallikarjuna Jyotirlinga || मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग



 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा, कैसे हुआ स्थापित

 यह ज्योतिर्लिंग आंध्रप्रदेश के में स्थित हैं। कहा जाता है कि यहां महादेव मां पार्वती के साथ विराजते हैं। आज हम दूसरे ज्योतिर्लिंग की कथा सुनाने जा रहे हैं। तो चलिए पढ़ते हैं मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा।

शिवपुराण के अनुसार, यह कथा शिव जी के परिवार से जुड़ी हुई है। भगवान शिव के छोटे पुत्र गणेश जी, कार्तिकेय से पहले विवाह करने चाहते थे। जब यह बात शिव जी और माता पार्वती को पता चली तो उन्होंने इस समस्या को सुलझाने के बारे में विचार किया। उन्होंने दोनों के सामने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि दोनों में से जो कोई भी पृथ्वी की पूरी परिक्रमा कर पहले लौटेगा उनका विवाह पहले कराया जाएगा। जैसे ही कार्तिकेय ने यह बात सुनी वो पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल गए। लेकिन गणेश जी ठस से मस नहीं हुए। वो बुद्धि के तेज थे तो उन्होंने अपने माता-पिता यानि माता पार्वती और भगवान शिव को ही पृथ्वी के समान बताकर उनकी परिक्रमा कर ली।

इस बात से प्रसन्न होकर और गणेश की चतुर बुद्धि को देखकर माता पार्वती और शिव जी ने उनका विवाह करा दिया। जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा कर वापस आए तो उन्होंने देखा की गणेश जी का विवाह विश्वरूप प्रजापति की पुत्रियों के साथ हो चुका था जिनका नाम सिद्धि और बुद्धि था। इनसे गणेश जी को क्षेम और लाभ दो पुत्र भी प्राप्त हुए थे। कार्तिकेय को देवर्षि नारद ने सारी बात बताई। इस कार्तिकेय जी नारा हो गए और माता-पिता के चरण छुकर वहां से चले गए।

कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर जाकर निवास करने लगे। उन्हें मनाने के लिए शिव-पार्वती ने नारद जी को वहां भेजा लेकिन कार्तिकेय नहीं माने। फिर पुत्रमोह में माता पार्वती भी उनके पास उन्हें लेने गईं तो उन्हें देखकर कार्तिकेय पलायन कर गए। इस बात से हताश माता पार्वती वहीं बैठ गईं। वहीं, भगवान शिव भी ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां प्रकट हुए। इसके बाद से ही इस जगह को मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाने लगा। इसका नाम मल्लिकार्जुन ऐसे पड़ा क्योंकि माता पार्वती के नाम से मल्लिका और भगवान शिव का नाम अर्जुन से भी जाना जाता है।  

अगली कहानी ये है कि चंद्रवती नामक राजकुमारी थीं। ये वो कहानी है जो कि मल्लिकार्जुन की दीवारों पर लिखी हुई है।

चंद्रवती, राजकुमारी का जन्‍म लेकर पैदा हुई और शाही ठाठ से रहती थीं। लेकिन उन्‍होंने ये सब त्‍याग कर दिया और अपना जीवन तपस्‍या में बिताने लगी। वो कदाली जंग में ध्‍यान लगाएं हुए थी कि उन्‍हें कुछ महसूस हुआ। उन्‍होंने देखा कि एक कपिला गाय बेल वृक्ष के पास है और अपने दूध से वहां के एक स्‍थान को धुल रही है। ऐसा हर दिन होता था। एक दिन जाकर राजकुमारी ने उस स्‍थान को देखा और वहां खुदाई की। यहां उसे एक शिवलिंग प्राप्‍त हुई जो कि अग्नि लौ की तरह दिख रही थी।

 

 

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश में स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव के अनुयायियों के लिए पूजा की एक बहुत प्राचीन जगह है। यह सभी ज्‍योतिर्लिंगों में सबसे ज्‍यादा अद्वितीय इसलिए है क्‍योंकि यहां भगवान शिव और माता पार्वती, दोनों ही मौजूद हैं। मल्लिकार्जुन दो शब्‍दों के मेल से बना है जिसमें मल्लिका का अर्थ माता पार्वती और अर्जुन का अर्थ भगवान शिव है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का एक अन्य महत्व यह है कि यह भी 275 पादल पैत्र स्‍थलम में से है। पादल पैत्र स्‍थल वो स्‍थान होते हैं जो भगवान शिव को समर्पित होते हैं। शैव नयनसार में छंदों में इन मंदिरों का वर्णन किया गया है जिन्‍हें 6वीं और 7वीं शताब्‍दी के सबसे महत्‍वपूर्ण स्‍थानों के रूप में वर्णित किया गया है।

 

मल्लिका देवी मंदिर

एक शक्ति पीठ के रूप में मल्लिकार्जुन मल्लिकार्जुन 52 शक्तिपीठों में से एक है। जब भगवान शिव ने अपनी पत्‍नी सती के जल जाने पर उसके शव को लेकर पूरे ब्रहमांड में तांडव किया था तब उनके शरीर के अंगों को भगवान विष्‍णु ने अपने सुदर्शन से काट दिया था जो 52 स्‍थानों पर जा गिरे थे। इन्‍हीं स्‍थानों को शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सती के होंठ का ऊपरी हिस्‍सा, मल्लिकार्जुन में गिरा था। इसलिए यह स्‍थान हिंदुओं के लिए और ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है।

मल्लिकार्जुन मंदिर के पीछे माँ पार्वती जी का मंदिर है। जिसे मल्लिका देवी कहते हैं। वहीँ स्थित कृष्णा नदी में भक्तगण स्नान करते है और उसी जल को भगवन को चढ़ाते हैं। कहते हैं कि नदी में दो नाले मिलते हैं। जिसे त्रिवेणी कहा जाता है। वहीँ समीप में ही गुफा है जहाँ भैरवादि और शिवलिंग हैं।

 

मल्लिकार्जुन मंदिर से लगभग 6 मील की दूरी पर शिखरेश्वर और हाटकेश्वर मंदिर भी है। वहीँ से 6 मील की दूरी पर एकम्मा देवी का मंदिर भी है। ये सारे  मंदिर घोर वन के बीच में स्थित हैं। इस स्थान के दर्शन करने से लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है और माँ पार्वती और शिव जी की कृपा बनी रहती है।

श्रीशैलम

श्रीशैलम् आन्ध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में स्थित है।श्रीशैलम् यह नल्लमाला पर्वत पर कृष्णा नदी के किनारे पर स्थित है। यहां भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी और भ्रमरंभा देवी  को समर्पित मंदिर है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक और माता सती  के 51 शक्ति पीठ मे से एक शक्ति पीठ है।

श्रीशैलम कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग द्वारा

हैदराबाद में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बना है।यह हवाई अड्डा हैदराबाद को सभी प्रमुख भारतीय और अंतरराष्ट्रीय स्थलों से जोड़ता है। यह देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है और जेट एयरवेज, एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस नई दिल्ली, मुंबई, गोवा, अगरतला, अहमदाबाद, बैंगलोर, चेन्नई और लखनऊ से उड़ान भरने के लिए संचालित हैं। हवाई अड्डा शहर से लगभग 30 किमी दुरी पर स्थित है।यात्रियों को हवाई अड्डे के बाहर से ऑटो और टैक्सी सेवा आसानी से उपलब्ध है।

रेल द्वारा

श्रीशैलम के नजदीकी रेलवे स्टेशन  गुंटूर-हुबली मीटर गेज रेल मार्ग में मार्कापुर है।श्रीशैलम से 90 किलोमीटर की दुरी पर है। दूसरा रेलवे स्टेशन हैदराबाद है। श्रीशैलम से हैदराबाद की दुरी 230 कि.मी.है। हैदराबाद से श्रीशैलम जाने के लिए टैक्सी, कार और बस उपलब्ध हैं।

हैदराबाद के रेलवे स्टेशन के नाम

हैदराबाद में तीन मुख्य रेलवे स्टेशन हैं, हैदराबाद रेलवे स्टेशन, सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन और कचिगुडा रेलवे स्टेशन। हैदराबाद दिल्ली, मुंबई, पुणे, चेन्नई और बैंगलोर जैसे भारत के प्रमुख शहरों से रेल से जुड़ा हुवा है। हैदराबाद से दूसरे शहरों में दैनिक आधार पर चल रही कुछ लोकप्रिय ट्रेनों में हैदराबाद एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, चारमीनार एक्सप्रेस, कोणार्क एक्सप्रेस और आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस शामिल हैं। टैक्सी या कैब रेलवे स्टेशन के बाहर से आसानी से उपलब्ध हैं।

 हैदराबाद से श्रीशैलम कैसे पहुंचे

हैदराबाद से दो बस स्टैंड पर से सरकारी बसे चलती है। (JBS)Jubilee Bus Station और MGBS (MAHATMA GANDHI BUS STATION) इन दोनों  बस स्टैंड से आंध्रा और तेलंगाना की सरकरी बसे चलती है।आप www.tsrtconline.in इस वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन बस टिकट बुक भी कर सकते है। टैक्सी या कैब रेलवे स्टेशन के बाहर से आसानी से उपलब्ध हैं।

श्रीशैलम कितने दिन रुके :- 2 दिन

 श्रीशैलम में कहाँ रुके

श्रीशैलम में देवस्थान के निम्न भक्त निवास में आप ऑनलाइन रूम बुक कर सकते है। ऑनलाइन रूम बुक करने के लिए देवस्थान की वेबसाइट www.srisailamonline.com पर जाये।

गंगा सदनमगौरी सदनम, चण्डीश्वरा सदनम, अन्नपूर्णासतराम बालिजा सतराम, काकतिया कम्मवारी सतरामनयी ब्रह्मणा चौल्ट्री, पद्मशालियुला सतराम, रेड्डी सतराम, श्रीविद्या पीठम, वासवी विहार, वेलमा सतराम

 रूम का किराया

देवस्थान भक्ति निवास का किराया नॉन ऐसी 300 से 700 तक है और ऐसी रूम का किराया 700 से 1200 तक है।

श्रीशैलम दर्शनीय स्थल

चेंचु लक्ष्मी जनजातीय संग्रहालय

श्रीशैलम से दुरी :- 1 km

यह जनजातीय संग्रहालय श्रीशैलम शहर के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। यह संग्रहालय श्रीसैलम जंगलों में रहने वाले विभिन्न स्वदेशी जनजातियों के जीवन की एक झलक प्रस्तुत करता है। संग्रहालय में चेंचु लक्ष्मी की मूर्ति भी देखी जा सकती है।यह संग्रहालय में वन जनजातियों, उनके प्रथाओं और संस्कृति के जीवन बेहतर तरीके से समझ में आती है। नल्लामाला पहाड़ियों में प्रमुख जनजातियों में से एक चेंंचस है। नल्लामाला वन जनजातियों का निवास स्थान रहा है, जो बाहरी दुनिया के साथ संपर्क में नहीं है। हालांकि, सरकार द्वारा ठोस सड़क के निर्माण के बाद, इन जनजातियों के लोग पर्यटकों के साथ घुल मिलने लगे है। इस जनजातीय संग्रहालय में दो मंजिल हैं; प्रत्येक मंजिल विभिन्न जनजातियों से संबंधित कलाकृतियों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में प्रदर्शित कुछ वस्तुओं में देवताओं, हथियार, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, संगीत वाद्ययंत्र और कई अन्य शामिल हैं।संग्रहालय के आसपास के क्षेत्र में, एक पार्क भी है जो डायनासोर, जनजातीय झोपड़ियों आदि की छवियों से भरा है। यहाँ संग्रहालय में दुकान में स्थानीय रूप से एकत्रित शहद बेचा जाता है। यहां बेची गई शहद जनजातियों के सदस्यों द्वारा एकत्र की जाती है और राज्य सरकार द्वारा बेची जाती है।

साक्षी गणपति मंदिर

श्रीशैलम से दुरी :- 3 km

साक्षी गणपति मंदिर श्रीशैलम के रास्ते पर स्थित है। इस मंदिर का दर्शन हर भक्त द्वारा किया जाता है जो श्री मल्लिकार्जुन स्वामी के दर्शन करने आते है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई भक्त साक्षी गणपति मंदिर नहीं जाता है तो उसकी श्रीशैलम की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है।इस मंदिर के  मुख्य देवता भगवान गणेश है। शाक्षी शब्द का मतलब है कि गवाह, भगवान गणेश मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का दौरा करने वाले सभी लोगों का रिकॉर्ड रखते है, जिसे भगवान शिव को दिखाया जाता है।

पाताल गंगा

श्रीशैलम से दुरी :- 1 km

कृष्णा नदी को पाताल गंगा कहा जाता है। पहाड़ी के निचे से बहती है इसलिए इसे पाताल गंगा कहते है। यहाँ पहुंचने के लिए लगभग 500 सीढिया उतरकर निचे जाना पड़ता है। निचे जाने के लिए रोपवे का इस्तेमाल भी कर सकते है। यहाँ स्नान करने के बाद भक्त श्री मल्लिकार्जुन स्वामी का दर्शन करते है।

पालधारा पंचधारा

श्रीशैलम से दुरी :- 4 km

भगवान आदि शंकराचार्य ने इस जगह पर तपस्या की और प्रसिद्ध 'शिवानंदलाहारी' की यहां रचना की। यह स्थान एक संकीर्ण घाटी में है जहां पैदल जाना पड़ता है। ऊपर 160 सीढिया चढ़कर जाना पड़ता है। पहाड़ियों से पानी की धारा गिरती रहती है।सभी मौसमों में धारा निरंतर गिरती रहती है।यह धारा कृष्णा नदी में शामिल हो जाती है।धारा का नाम भगवान शिव से लिया गया है। माना जाता है की पालधारा भगवान शिव के माथे से उत्पन्न हुई है।धारा के पानी में औषधीय गुन है इसलिए भक्त अपनी बीमारियों को ठीक करने के लिए यहां से पानी ले जाते हैं।इस स्थान पर 8 वीं शताब्दी में श्री आदि शंकराचार्य ने ध्यान किया था। ऐसा कहा जाता है कि इस अवधि के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध कृति शिवानंदलाहारी बनाई है जिसमे उन्होंने भगवान मल्लिकार्जुन की छंदों में प्रशंसा की थी। श्री आदि शंकराचार्य ने देवी भ्रामारम्बा के बारे में भी लिखा है और उन्हें एक और सृजन भ्रामारम्बा अष्टका में प्रशंसा की है। इसके कारण, सरदा देवी और श्री आदि शंकराचार्य की मूर्तियां यहां बनाई गई हैं।

हटकेश्वर मंदिर

श्रीशैलम से दुरी :- 5 km

'हटका' का मतलब सोना(गोल्ड) होता है। भगवान शिव ने इस स्थान पर त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। यहां स्वर्ण लिंगम आकार में शिव की पूजा की जाती है । इसलिए इसे हत्केश्वरम कहा जाता है। मंदिर के सामने, 150 फीट क्षेत्र का एक पानी तालाब भी बना है। इसे हाथकेस्वर तीर्थ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त यहां स्नान करता है  और पलधारा-पंचधारा में पानी पिता  हैं, उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है।

सिखरेश्वरा

श्रीशैलम से दुरी :- 8 km

श्रीशैलम में सिखरेश्वरा स्वामी मंदिर एक लोकप्रिय जगह है। श्रीशैलम की सर्वोच्च चोटी पर स्थित है जो सिखाराम के नाम से जाना जाता है। यह प्राचीन मंदिर वीरा शंकर स्वामी को समर्पित है।ईस्वी 1398 में, रेड्डी राजाओं ने यहाँ सीढ़ियों और एक कुंड का निर्माण कराया था। इस मंदिर से खड़े होकर पूरी घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।यहाँ से पूरे श्रीशैलम मंदिर और कृष्णा नदी का सुन्दर दृश्य आसानी से दिखता है। एक मान्यता के अनुसार इस मंदिर में स्थापित नंदी जी के सींगों के मध्य से होकर श्रीशैलम मंदिर के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

श्रीशैलम डैम

श्रीशैलम से दुरी :- 13 km

श्रीशैलम पर्यटन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा श्रीशैलम बांध है। जो कृष्णा  नदी पर निर्मित है। नल्लामाला पहाड़ियों में स्थित, श्रीशैलम बांध देश में दूसरी सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। कृष्णा नदी का दृश्य शांत पानी के विशाल फैलाव के साथ बहुत ही आकर्षक दिखता है। जब बारीश के मौसम में डैम पूरी तरह पानी से भर जाता है तब क्रेस्ट द्वार खोले जाते हैं। पानी की भारी धारा, क्रिस्ट गेट्स से शक्तिशाली रूप से बाहर निकलती है। यह दृश्य देखने लायक होता है।

अक्का  माहदेवी गुफाएं

श्रीशैलम से दुरी :- 10 km

अक्कमाहदेवी भगवान मल्लिकार्जुनस्वामी के भक्त थी। उनका जन्म कर्नाटक के शिमोगा जिले के 'उदुतदी' गांव में हुआ था। उनके माता-पिता सुमाथी और निर्मला सेटी, शिवा भक्त थे। राजा कुशिकुदु के साथ विवाह करने की चाह रखती थी।राजा कुशिकुदु को पाने के लिए वह श्री मल्लिकार्जुन स्वामी को प्रसन्न करने के लिए श्रीशैलम आई और तपस्या करने इस गुफाओं तक पहुंची, जिन्हें अब अक्कमाहदेवी गुफा कहा जाता है। उन्होंने इन गुफाओं में तपस्या की थी।ये गुफा स्वाभाविक रूप से गठित, बहुत ही आकर्षक और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र हैं।

इष्टकामेश्वरी देवी

श्रीशैलम से दुरी :- 21 km

यह मंदिर श्रीशैलम पहाड़ी के घने जंगल में स्थित है। यह मंदिर 8 वीं -10 वीं सदी से संबंधित है। इष्टकामेश्वरी पार्वती देवी का एक और नाम है। वर्तमान समय में भी यहाँ पहुंचना मुश्किल है। निजी वाहनों को यहाँ अनुमति नहीं है और इसलिए वन विभाग के वाहनों को किराए पर लेना पड़ता है। मूर्ति में एक विशेषता है कि यदि आप माथे को छूते हैं तो आप मानव त्वचा की तरह महसूस कर सकते हैं।

श्रीशैलम अभयारण्य

श्रीशैलम से दुरी :- 30 km

जीप सफारी का समय :- सुबह 7 बजे से दुपहर 4 बजे तक (डेढ़ घंटा)

भारत में सबसे बड़ा बाघ रिजर्व, नागार्जुन श्रीशैलम टाइगर रिजर्व श्रीशैलम वन्यजीव अभयारण्य के रूप में जाना जाता है, श्रीशैलम में देखने के लिए सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है। तेलंगाना के पांच जिलों में फैला हुआ है जो कुल 3568 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल है, यह नागार्जुन सागर जलाशय और श्रीशैलम जलाशय के बीच घिरा हुआ है। बाघ रिजर्व का मुख्य क्षेत्र लगभग 1,200 वर्ग किमी है।इस अभयारण्य के अंदर, आप कई जंगली जानवरों को देख पाएंगे जिसमें बाघ,लकड़बग्घा,तेंदुआ, पाम सिवेट, जंगली बिल्ली, भालू, हिरण शामिल है। श्रीशैलम बाघ अभयारण्य आपकी यात्रा को एक यादगार अनुभव बनाता है।

मल्लेला तीर्थम वाटर फॉल

श्रीशैलम से दुरी :- 58 km

मल्लेला तीर्थ श्रीशैलम के नजदीक स्थित एक अद्भुत झरना है। नल्लामाला के शांत घने जंगल के बीच स्थित है। यह श्रीशैलम - हैदराबाद राजमार्ग के एक छोटे से गांव vatvarla Palli के नजदीक स्थित है। वन में 10 किमी की यात्रा वाहन से करनी पड़ती है और आगे की दुरी 2 किमी पैदल चलकर करनी पड़ती है। देश की दूसरी सबसे लंबी नदी, कृष्णा नदी इस जंगल से बहती है।घने वन के बीच में स्थित इस झरने तक पहुंचने के लिए 350 कदम निचे जाना पड़ता है। साहसिक पर्यटन और वन्यजीवन में रुचि रखने वालों के लिए यह एक आदर्श स्थान है। प्रकृति की सुन्दर हरियाली का आनंद ले रहे जंगल के माध्यम से चलना और ताजा हवा का आनंद उठाना एक रोमांच से भरा अनुभव है।

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