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जनस्थान शक्तिपीठ || Janasthan Shakti Peeth

 

जनस्थान शक्तिपीठ  || Janasthan Shakti Peeth

 


कहाँ स्थित है


महाराष्ट्र के नासिक नगर स्थित गोदावरी नदी घाटी स्थित जनस्थान पर माता की ठोड़ी गिरी थी। यह स्थान नासिक रोड स्टेशन से लगभग 8 किलोमीटर दूर पंचवट क्षेत्र में स्थित है जिसे भद्रकाली शक्तिपीठ भी कहते हैं। इसकी शक्ति है भ्रामरी और भैरव है विकृताक्ष।

भद्रकाली मंदिर ही वो शक्तिपीठ है, जहां सती का 'चिबुक' भाग गिरा था। अत: यहां चिबुक ही शक्तिरूप में प्रकट हुआ। इस मंदिर में शिखर नहीं है, सिंहासन पर नव-दुर्गाओं की मूर्तियां हैं, जिनके बीच में भद्रकाली की ऊंची मूर्ति है। इस्लामिक आक्रांताओं के कारण पहले गांव के बाहर पहाड़ी पर मूर्ति स्थापित कर दो मंजिला मंदिर बनाया परंतु उस पर कलश स्थापित नहीं किया ताकि कोई यह नहीं जान सके कि यह मंदिर है। इसी से इस पर शिखर नहीं है।


पौराणिक  कथा


पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती का 'चिबुक' भाग गिरा था।



मंदिर की वास्तुकला


मंदिर में माँ भद्रकाली की अत्यंत आकर्षक प्रतिमा लगभग 38 सेंटीमीटर ऊँची है और इनकी 18 भुजाओं में विविध आयुध हैं।

इस्लाम शासन में मूर्ति अपमानित न हो, इसलिए गाँव के बाहर एक पहाड़ी पर मूर्ति स्थापित की गयी तथा 1790 में सरदार गणपत राव पटवर्धन दीक्षित ने वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया। इसे 'देवी का मठ' कहा गया।


आकर्षण का केन्द्र


त्रिकाल-पूजन


यहाँ मंदिर की ओर से ही 'प्राच्यविद्यापीठ' की स्थापना की गयी है, जहाँ पुरातन गुरु परंपराधारित वेद-वेदांग का अध्ययन होता है। छात्र मंदिर के आस-पास स्थित ब्राह्मणों के 350 घरों से 'मधुकरी' लाते हैं। उसी का नैवेद्य माँ को अर्पित किया जाता है तथा माँ के त्रिकाल-पूजन की व्यवस्था भी छात्र ही करते हैं। निकटस्थ प्रवासी ब्राह्मण परिवारों के घर से क्रमानुसार पूजार्चन, नैवेद्य, देवी पाठ, नंदादीप आदि के लिए सामग्री-संग्रहण किया जाता है। 



कैसे पहुंचे


महाराष्ट्र में मध्य रेलवे के मुम्बई-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर, नासिक रोड स्टेशन से लगभग 8 कि.मी. दूर पंचवटी नामक स्थान पर स्थित भद्रकाली मंदिर ही शक्तिपीठ है

मंदिर का समय- सुबह 5 बजे से दोपहर 1:30 बजे और दोपहर 3:30 बजे से रात 8:30 बजे तक

मंदिर दर्शन का सही समय- अगस्त से मार्च के बीच में,


प्रमुख त्यौहार


नवरात्र का उत्सव शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक धूमधाम से मनाया जाता है।

निकतम रेलवे स्टेशन – नासिक रोड स्टेशन

निकतम हवाई अड्डा – नासिक

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नन्दीपुर शक्तिपीठ || Nandipur Shakti Peeth