सुचीन्द्रम शक्तिपीठ || Suchindram Shakti Peeth
कहाँ स्थित है
तमिलनाडु में कन्याकुमारी के 'त्रिसागर' संगम स्थल से 13 किलोमीटर की दूरी पर सुचीन्द्रम में स्थित स्थाणु-शिव के मंदिर में ही शुचि शक्तिपीठ स्थापित है। यहाँ सती के 'ऊर्ध्वदंत'] गिरे थे। यहाँ की शक्ति 'नारायणी' तथा भैरव 'संहार या 'संकूर' हैं। मान्यता है कि यहाँ देवी अब तक तपस्यारत हैं। शुचींद्रम क्षेत्र को ज्ञानवनम् क्षेत्र भी कहते हैं। महर्षि गौतम के शाप से इंद्र को यहीं मुक्ति मिली थी, वह शुचिता (पवित्रता) को प्राप्त हुए, इसीलिए इसका नाम शुचींद्रम पड़ा।
पौराणिक कथा
पौराणिक आख्यान है कि बाणासुर ने घोर तपस्या करके शिव से अमरत्व का वरदान माँगा। शिव ने कहा कि वह कुमारी कन्या के अतिरिक्त सभी के लिए अजेय होगा। वर पाकर वह उत्पाती हो गया तथा देवताओ को भी परास्त कर डाला, जिसके देवलोक में भी त्राहि-त्राहि मच गई। इस पर देवगण विष्णु की शरण में गए और उनके परामर्श पर महायज्ञ किया, जिससे भगवती दुर्गा एक अंश से कन्या रूप में प्रकटीं। देवी ने शिव को पति रूप में पाने हेतु दक्षिण समुद्र तट पर तप किया और शिव ने उन्हें वांछित वर दिया। इस पर देवताओं को चिंता हुई कि यदि कन्या का शिव से विवाह हो गया, तो बाणासुर का वध कैसे होगा? अतः नारद ने शिव को शुचींद्रम तीर्थ में प्रपंच में उलझा दिया, जिससे विवाह मुहूर्त निकल गया। इससे शिव वहाँ पर स्थाणु रूप में स्थित हो गए। देवी ने पुनः तप प्रारंभ किया और मान्यता है कि वह अब तक कन्यारूप में तपस्यारत हैं। इधर अपने दूतों से देवी के सौंदर्य की चर्चा सुन बाणासुर ने उसने विवाह का प्रस्ताव किया, तब उसका देवी से युद्ध हुआ और अंततः बाणासुर का वध देवी के हाथों हो गया।
पौराणिक कथा देवी के स्वरुप में
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती की ऊपर के दांत इस स्थान पर गिरे थे। पौराणिक कथा के अनुसार देवों के राजा इन्द्र को महर्षि गौतम द्वारा दिये गए अभिशाप से इस स्थान पर मुक्ति मिली थी।
मंदिर प्रागण
यह मंदिर सात मंजिला है जिसका सफेद गोपुरम काफी दूर से दिखाई देता है। इस मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में किया गया था। सुचीन्द्रम शक्तिपीठ, मंदिर में बनी हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का प्रवेश द्वार लगभग 24 फीट उंचा है जिसके दरवाजे पर सुंदर नक्काशी की गई है। यह मंदिर बड़ी संख्या में वैष्णव और सैवियों दोनों को आकर्षित करता है। मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के लिए लगभग 30 मंदिर है जिसमें पवित्र स्थान में बड़ा लिंगम, आसन्न मंदिर में विष्णु की मूर्ति और उत्तरी गलियारे के पूर्वी छोर पर हनुमान की एक बड़ी मूर्ति है। यह मंदिर हिंदू धर्म के लगभग सभी देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
मंदिर के मुख्य देवता भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को एक ही रूप में स्तरनुमल्याम कहा जाता है। स्तरनुमल्याम तीन देवताओं को दर्शाता है जिसमें ‘स्तानु’ का अर्थ ‘शिव’ है, ‘माल’ का अर्थ ‘विष्णु’ है और ‘आयन’ का अर्थ ‘ब्रह्मा’ है। भारत के उन मंदिरों में से एक है जिसमें त्रीमूर्ति व तीनों देवताओं की पूजा एक मंदिर में की जाती है।
यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में शक्ति को नारायणी के रूप पूजा जाता है और भैरव को संहार भैरव के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाते हैं। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं।
आकर्षण का केन्द्र
सुचीन्द्रम शक्तिपीठ में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर शिवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। लेकिन दो प्रमुख त्यौहार है, जो इस मंदिर का प्रमुख आकर्षण का केन्द्र हैं, ‘सुचंद्रम मर्गली त्यौहार’ और ‘रथ यात्रा’ हैं। इन त्यौहारों के दौरान, कुछ लोग भगवान की पूजा के प्रति सम्मान और समर्पण के रूप में व्रत (भोजन नहीं खाते) रखते हैं। त्यौहार के दिनों में मंदिर को फूलो व लाईट से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।
कैसे पहुंचे
लोकेशन- कन्याकुमारी,सुचिन्द्रम,तमिलनाडु-
मंदिर का समय- सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1 बजे तथा शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक
मंदिर दर्शन का सही समय- अगस्त से मार्च के बीच में, खासकर सुचंद्रम मर्गली त्यौहार, रथ यात्रा, दुर्गा पूजा और नवरात्र में
प्रमुख त्यौहार- सुचंद्रम मर्गली त्यौहार और रथ यात्रा
निकतम रेलवे स्टेशन – कन्याकुमारी
निकतम हवाई अड्डा – तिरुवनंतपुरम





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